केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय ने आकस्मिक पशु चिकित्सा सेवा हेतु राज्यों को पत्र लिखा किन्तु "करोना प्रसार लाक डाउन"की शुआत के बाद

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पशु पोषण अनुसंधान दर्शन में प्रकाशित  समाचार के बाद  


उत्तराखंड सरकार द्वारा पशु चिकित्सकों  की पहल पर उन्हें आकस्मिक सेवा में शामिल करने  के बाद केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय की आंखें खुली और सभी राज्यों को आकस्मिक सेवा में शामिल करने के लिए पत्र लिखा 



लखनऊ (उत्तर प्रदेश)


कितनी विडंबना है कि अंतरराष्ट्रीय पटल पर "वन का वन हेल्थ  अप्रोच का कॉन्सेप्ट" दुनिया भर में प्रचारित किया जा रहा है. वहीं भारत जैसे देश में  जन स्वास्थ्य एवं भोजन व्यवस्था  के प्रबंधन में पशु चिकित्सकों को यथोचित सम्मान देने के लिए  सरकार को  बार-बार सोचना पड़ता है जबकि , विश्व स्वास्थ्य संगठन संयुक्त राष्ट्र के अधीन कार्यरत  विश्व कृषि एवं खाद्य संगठन सहित पशु स्वास्थ्य के लिए  कार्यरत विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (ओआईई)  द्वारा "वन हेल्थ जन स्वास्थ्य व्यवस्था" को सब की खुशहाली के लिए आवश्यक बताया जा रहा है. इस संबंध में करुणा वायरस को नियंत्रित करने के लिए पशु चिकित्सकों को आकस्मिक सेवा सूची से अलग किया गया था  और "लॉक डाउन" किस बात के बाद केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय की आंख खुली है. केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय ने राज्य सरकारों को पत्र लिखकर के आग्रह किया है कि पशु चिकित्सा सेवा को आकस्मिक सेवा में शामिल किया जाए. 


यह बता दें कि पशु पोषण अनुसन्धान दर्शन में प्रकाशित  समाचार ( https://pashuposhananusandhandarshan.page/article/desh-mein-pashu-svaasthy-seva-ka-anokha-udaaharan-bana-uttaraakhand-karona-niyantran-seva-dal-mein-k/B3v57O.html ) जिसमें उत्तराखंड पशुपालन विभाग द्वारा करोना  प्रसार  "लाकडाउन"  दिवस के शुरुआती दिन, 22 मार्च ,2020 को  राज्य के द्वारा जारी  आकस्मिक सेवा  हेतु सम्मिलित विभागों  की सूची में  पशु चिकित्सकों को  सम्मिलित नहीं किए जाने से  उत्तराखंड के पशुपालन विभाग में असंतोष था. इस सिलसिले में उत्तराखंड पशु चिकित्सा संघ की ओर से राज्य सरकार को प्रेषित 19 मार्च के लिखे गए  एक अनुरोध  पत्र  के माध्यम से  पशु चिकित्सा सेवा को आकस्मिक सेवा सूची में शामिल किए जाने का आग्रह  किया गया था जिसे वहां की सरकार ने  उसी दिन मान लिया और मनुष्य की तरह  जीवन संकट से जूझ रहे आकस्मिक सेवा की तलाश में पशु पक्षी और उनसे जुड़े पशुपालकों की  सेवा के लिए पशु चिकित्सा विभाग की सेवाएं बहाल  करने के लिए आदेश जारी कर दिया गया किंतु तरुण मित्र में प्रकाशित समाचार को पढ़ने के बाद  केंद्र सरकार की आंखें खुली और केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय अपनी गलतियों को सुधारते हुए करोना वायरस के "लॉक डाउन" के  पहला दिन बीत जाने के बाद देश के सभी राज्य को  आज पत्र लिखकर आग्रह किया कि पशु चिकित्सा सेवा को आकस्मिक सेवा में शामिल किया जाय और पशुओं के हित का ख्याल रखा जाए. 


इस घटनाक्रम को केंद्रीय पशुपालन मंत्रालय की  सतर्कता मानी जाए या लापरवाही.हालांकि, देशभर के पशु प्रेमियों एवं पशुपालकों से लेकर सामान्य व्यक्ति उत्तराखंड पशु चिकित्सा संघ  के वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ आशुतोष जोशी डॉ कैलाश उनियाल की सराहना कर रहा है. झारखंड राज्य जीव जंतु कल्याण बोर्ड के प्रभारी डाक्टर शिवानंद काशी ने बताया कि इस समाचार के बाद इंडियन वेटरनरी एसोसिएशन के अध्यक्ष  तथा पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद मेनका गांधी ने भी पशु चिकित्सा सेवा को जारी रखने बात कही ताकि  आकस्मिक पशु स्वास्थ्य  सेवाएं  जारी रहे तथा बेसहारा  पशुओं का भरण पोषण भी  होता रहे.


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